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sadasya ke baat:Anjana march 18/sandbox

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मेरा नाम अंजना राधाकृष्णन है।मेरा उम्र १८ है। मेरा पैतृक स्थान पालक्काड(केरल)है। मगर पिताजी के भारतीय वायु सेना में काम होने के वजह से मैने अपना पूरा बचपन भारत के अन्य राज्यों में गुज़ारा है जैसे दिल्ली,तमिल नाडू, मुंबई, आदि। मेरे माता,पिता,बहन सम्मिलित मेरा परिवार अत्यंत एकता एवं प्यार से भरी हुई है।मेरी माँ एक ग्रहस्थिनी है और मेरी बहन एम.बी.ए कर रही है।साल में वार्षिक छुट्टि के अवसर में हम अकसर केरल जाते हैं जहाँ मेरे नाना-नानी रहते हैं सनात्तक प्राप्त करने के लिये बेंगलूरू में क्राइस्ट संस्थान में अभी पड रही हूँ। मैं मनोविज्ञान में विशेषज्ञता प्राप्त करना चाहती हूँ और भारत में ही बसना चाहती हूँ। दस्वीं कक्षा से ही मुझे मनोविज्ञान में प्रत्येक रुची थी। ग्यारवी कक्षा मे उसी रुची के वजह से आर्ट्स लिया जिसमे मनोविज्ञान भी मौजूद था और खुद अपनी परिक्ष्रम से अच्छे अंक प्राप्त की जो मेरे लिये एक बडा प्रेरणा का स्रोत बना। मेरा सबसे बडा मेरुदंड मेरा परिवार ही रहा है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि वे आगे भी रहेंगे। मुझे पढ़ाई के बारे मे जानकारियाँ मेरी बहन ही देती रही है जो मेरे लिये अत्यधिक महत्त्वपूर्ण और उपयोगी रहा। मैं अपने जीवन मैं भाग्यशाली रही हूँ क्योंकि मुझे बहुत अच्छे दोस्त भी मिले हैं जो अपने परिवार के सदस्यों से कम नहीं हैं।भविष्य के बारे में भी मेरा एक निश्चित विचार बना हुआ है। मुंबई शहर मेरे लिये अत्यंत महत्त्व्पूर्ण है।जिस तरह से उस शहर क जादू मुझपर छाया है और किसी शहर में मैने महसूस नहीं किया। बेंगलूरु में रहते हूए भी मैं हरपल उसी शहर के बारे मे सोचती रहती हूँ।मुंबई में काम करना और वहीं पर बसना मेरा एक सपना है। वर्तमान में मेरा आशा है कि मैं अच्छे तरीके से अपना पढ़ाई पूर्ण करूँ साथ ही साथ धीरे धीरे अपने माँ-बाप पर कम निर्भर होना सीखूँ।

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